IPO के फायदे और नुकसान | IPO के लाभ और हानि

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आईपीओ के लाभ और नुकसान निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। विविधीकरण, उच्च लाभ, पूंजी वृद्धि, और सामाजिक जागरूकता आईपीओ के फायदे हैं, जबकि मूल्यांकन की अज्ञानता और अधिकारों की सीमितता नुकसान का कारण बन सकते हैं।

IPO (Initial Public Offering) एक ऐसा प्रक्रिया है जिसमें एक निजी कंपनी सार्वजनिक तौर पर स्टॉक मार्केट में अपने Shareholders के लिए अपने शेयरों को बेचती है। यह एक तरह का प्राथमिक सामग्री जुटाने का तरीका होता है जिसके माध्यम से कंपनी अधिक पूंजी जुटा सकती है।

आईपीओ के बाद, कंपनी की शेयरों को सार्वजनिक बाजार में खरीदने और बेचने की स्वतंत्रता मिलती है। यह निवेशकों को कंपनी के हिस्सेदार बनने का और उसके साथ उसके लाभ में हिस्सा प्राप्त करने का मौका देता है।

लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। और इससे पहले वे किसी भी investment decision पर पहुंचे ये जान लेना आवश्यक है की IPO के लाभ और हानि क्या क्या है।

IPO के फायदे? IPO के लाभ, IPO का महत्व

निचे दी गयी जानकारी आपको IPO के फायदे की सटीक जानकारी देगी की आखिर किसी investor को IPO क्यों खरीदना चाहिए और एक कंपनी के लिए IPO का महत्त्व क्या है इसके बारे में हम डिटेल में जानेंगे।

विविधीकरण (Diversification)

आईपीओ के माध्यम से आप विभिन्न कंपनियों में निवेश करके अपने Investment portfolio का diversification कर सकते हैं। यानी आप अपने पैसे को अलग-अलग प्रकार की कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। यह आपकी investment risk को कम करने में मदद कर सकता है।

उदहारण: आपने ग्राहक सेवा कंपनी में, तकनीकी कंपनी में, और खाद्य प्रसंस्करण कंपनी में निवेश किया। इससे आपके पास अलग-अलग क्षेत्रों में हिस्सेदारी हो जाती है, और यदि किसी क्षेत्र में कोई दिक्कत आती है, तो आपके पूरे Portfolio का प्रभाव कम होता है। यह आपकी Investment risk को कम करने में मदद कर सकता है।

उच्च लाभ की संभावना (Potential for High Returns)

IPO में निवेश करके आपको अधिक लाभ की संभावना होती है। यह इसलिए है क्योंकि जब एक कंपनी आईपीओ के माध्यम से Public होती है, तो उसके स्टॉक की मांग बढ़ सकती है और इससे स्टॉक के मूल्य में वृद्धि हो सकती है।

उदहारण: मान लीजिए, आपने एक आईपीओ में 100 Share खरीदे और उनका मूल्य आईपीओ के बाद दोगुना हो गया। इसका मतलब है कि आपके पूरे निवेश की मात्रा दोगुनी हो गई है, यानी आपने जो पैसे निवेश किए थे उनका मूल्य दोगुना हो गया है।

प्रारंभिक पहुँच (Early Access)

आईपीओ में Investors को संभावित रूप से सफल कंपनी में निवेश करने का मौका पहले मिलता है, जिससे वे सामान्य जनता से पहले ही उस कंपनी के Shares में हिस्सेदारी प्राप्त कर सकते हैं।

उदाहरण: सोचिए आपने एक कंपनी में आईपीओ के माध्यम से निवेश किया और वह कंपनी शेयर मार्किट में Public होने के बाद सफल हो गई। अब जब यह कंपनी सार्वजनिक होने के बाद सफल हो रही है तो उसका Share Price भी बढ़ गया होगा, तो आपको उसके Shares में हिस्सेदारी Low Price पर पहले ही मिल जाएगी, जबकि सामान्य लोगों को इसका मौका शायद High Price पर बाद में ही मिलेगा।

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लिक्विडिटी (Liquidity)

लिक्विडिटी का मतलब होता है किसी वस्तु को आसानी से नकदी में बदलने की क्षमता। आईपीओ के माध्यम से कंपनी के Public होने पर, Investor को खरीदे हुए शेयरों को बेचकर cash में बदलने का मौका मिलता है।

इस प्रकार, आईपीओ से सार्वजनिक होने से निवेशकों को उनके निवेश को लिक्विड करने की स्वतंत्रता मिलती है, जिससे उन्हें आवश्यकताओं के लिए स्थिरता और नियंत्रण की अनुमति मिलती है।

उदहारण: एक निवेशक ने किसी कंपनी के IPO में निवेश किया था और उसने एक्सपेक्टेशन से ज्यादा मुनाफा कमाया। अब उसके पास दो विकल्प हैं – वह अपने निवेश को रखकर कंपनी के विकास में हिस्सेदारी बना सकता है या वह उन शेयरों को बेचकर नकदी में बदल सकता है।

पूंजी वृद्धि (Capital Growth)

एक कंपनी जब आईपीओ के माध्यम से सार्वजनिक होती है, तो जब उसके हिस्सों की मूल्य में वृद्धि होती है। इसी के साथ उसके निवेशकों की पूंजी में भी वृद्धि होती है। क्योंकि जब एक कंपनी सफलतापूर्वक विकसित होती है, तो उसके Shares की मूल्य में वृद्धि होती है जो निवेशकों को लाभ प्रदान करती है।

उदहारण: सुपरटेक इंकॉर्पोरेशन नामक कंपनी ने आईपीओ के माध्यम से सार्वजनिक होकर बड़ी सफलता पाई। उनके नए तकनीकी उत्पादों और सेवाओं की मांग बढ़ गई और इसके परिणामस्वरूप कंपनी की Market Share की मूल्य में वृद्धि हुई। आईपीओ से प्राप्त पूंजी का उपयोग कंपनी विकास के लिए किया गया और नए उत्पाद विकसित करने, ग्लोबल विस्तार करने और तकनीकी नौकरियों की संख्या में वृद्धि करने में किया गया। इससे कंपनी के Share Price में वृद्धि हुई और निवेशकों की Invested Capital बढ़ गई।

विकास में भागीदारी (Participation in Growth)

IPO Investors किसी कंपनी के विकास की कहानी में हिस्सा बन सकते हैं और सफल Exit Zone तक उसके साथ जुड़े रह सकते हैं। जब विकासशील कंपनियाँ आईपीओ के माध्यम से Capital Raise करते हैं, तो उनके निवेशक न केवल पैसे का निवेश करते हैं, बल्कि वे उन कंपनियों के सफलता में भी हिस्सा बनते हैं। उनका सहयोग कंपनी को आगे बढ़ने में मदद करता है और वे अपने निवेशों के साथ जुड़े रहते हैं, जब वे कंपनी को बेचने का निर्णय लेती है।

उदाहरण: एक निवेशक ने एक Tech Company के IPO में निवेश किया। उसके साथी निवेशकों के साथ, उस कंपनी ने नवाचारी तकनीक विकसित की जिसने बाजार में बड़ी popularity प्राप्त की जिसकी वजह से कंपनी को मुनाफा हुआ। थोड़ी समय बाद, उन्होंने अपने हिस्से को बेचकर बड़ा लाभ प्राप्त किया, लेकिन उन्होंने कंपनी के सफलता में भी अपना हिस्सा बनाए रखा। यहाँ तक कि उन्होंने विकसित तकनीक का उपयोग और बेचे गए हिस्सों के आदान-प्रदान के साथ उनका नाम कंपनी के सफल विकास की कहानी में शामिल किया।

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उच्च प्रतिस्पर्धा में उच्च दिखावा (Higher Visibility)

सार्वजनिक आईपीओ के माध्यम से कंपनियों का स्थान Finance Market में बढ़ता है, जिससे उन्हें अधिक attention और recognition मिलती है। वित्तीय बाजार में उच्च दिखावा वाली कंपनियों की सामर्थ्य और सफलता की खबरें मीडिया में प्रकाशित होती हैं, जिससे कंपनी पर विश्वास और आकर्षकता बढ़ती है।

उदाहरण: मान लीजिए, ‘XYZ टेक्नोलॉजी’ नामक कंपनी ने आईपीओ के माध्यम से सार्वजनिक होने का निर्णय लिया। उसने इस आईपीओ के माध्यम से निवेशकों को अपने हिस्सेदारी में शामिल किया। Word of Mouth के जरिये कंपनी की स्थिति Financial Market में मजबूत हो गई। मीडिया ने उसकी नवाचारों और सफलताओं की चर्चा की और उसकी मान्यता बढ़ी।

संस्थागत रुचि (Institutional Interest)

संस्थागत रुचि का मतलब होता है कि पेंशन फंड्स, निवेश कंपनियाँ, अन्य वित्तीय संस्थाएँ, और मुख्यतः बड़े निवेशक जो किसी कंपनी के हिस्सों में निवेश करने की क्षमता रखते हैं, वे उन कंपनियों में Institutional Interest को प्रकट करते हैं।

उदाहरण: चलिए मान लीजिए कि एक नयी तकनीकी कंपनी, “XYZ”, आईपीओ के माध्यम से सार्वजनिक होने जा रही है। यह कंपनी नए High-tech products का निर्माण कर उन्हें बाजार में लाना चाहती है। जब यह आईपीओ होती है, तो कुछ बड़े पेंशन फंड्स और निवेश कंपनियाँ इसके Shares में निवेश करने में रुचि दिखा सकती हैं। इसका मतलब होता है कि उन्हें कंपनी के विकास और सफलता के संकेत मिल रहे हैं। इससे कंपनी के Share value बढ़ सकती है क्योंकि संस्थागत निवेशकों के निवेश के कारण कंपनी का स्थिति मजबूत होता है और यह बाजार में अधिक आकर्षक लगती है।

वृद्धि के वित्तीय संसाधन (Enhanced Financial Resources)

ये भी IPO के फायदे का एक पहलू है। जब एक कंपनी आईपीओ के माध्यम से सार्वजनिक होती है, तो वह पूंजी जुटा सकती है जिसका उपयोग उसके development, research, production enhancement और अन्य विकासी कार्यक्रमों के लिए किया जा सकता है।

यह आवश्यक होता है क्योंकि कंपनी के विकास और वृद्धि के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है, जिससे नए प्रोजेक्ट्स को शुरू करने, नई तकनीकों का अनुसंधान करने और उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने का माध्यम बनता है। इसके बिना, कंपनी की स्थिति और उसकी विकास साधना मुश्किल हो सकती है।

उदाहरण: एक Food Processing कंपनी ने आईपीओ के माध्यम से सार्वजनिक होने का फैसला किया। उसके पास पहले से ही कुछ उत्पादन क्षमता थी, लेकिन वह नए उत्पादों की तकनीकों का अनुसंधान करना चाहती थी। आईपीओ से जुटाए गए पूंजी का उपयोग उसने नए Project के लिए किया और नतीजतन वह नए प्रकार के उत्पाद विकसित करने में सक्षम हुई। इससे कंपनी ने अपनी Production में वृद्धि की और उसकी मौजूदा Product Demand में भी वृद्धि हुई।

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कर्मचारी लाभ (Employee Benefits)

यह एक आईपीओ के फायदे में से एक है, जिसमें कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को स्टॉक विकल्प या हिस्से देती हैं। इससे कर्मचारियों को कंपनी के सफलता और विकास के साथ जुड़ने का मौका मिलता है और उन्हें कंपनी की वृद्धि में भागीदारी का आत्मविश्वास होता है।

उदहारण: Freshworks Company के Nasdaq stock exchange पर सूचीबद्ध होने के साथ ही उनके करीब 500 कर्मचारी भारत में करोड़पति बन गए हैं। जब कंपनी का स्टॉक Nasdaq पर लिस्ट हुआ, तो स्टॉक की कीमत $43.5 पर होगी, जो कि लिस्टिंग मूल्य $36 से 21 प्रतिशत ऊपर था। Freshworks के कर्मचारी, जिन्होंने यहाँ तक कंपनी के साथ मिलकर काम किया है, उन्हें उसकी सफलता का लाभ मिल रहा है, क्योंकि उनके पास कंपनी के स्टॉक के हिस्से हैं, जिनकी मूल्य में वृद्धि हुई है ।

विलय और अधिग्रहण (Mergers and Acquisitions)

आईपीओ के माध्यम से सार्वजनिक होने के बाद, कंपनियाँ Merger और Acquisition की Process के दौरान अपने Shares का मुद्रा के रूप में उपयोग कर सकती हैं। यह मानव संसाधन, प्रौद्योगिकी, या बाजार पहुँच बढ़ाने के लिए मददगार साबित हो सकता है, जिससे कंपनी का सांविदानिक विकास हो सकता है।

उदहारण: एक हाइटेक कंपनी ने IPO के माध्यम से सार्वजनिक होने के बाद, वह एक small startup कंपनी को अधिग्रहण करने का फैसला लिया। यह स्टार्टअप कंपनी नई तकनीकी नवाचारों के साथ आई थी, जो उस हाइटेक कंपनी की विकास योजनाओं को बढ़ावा देने में मदद कर सकती थी। इस प्रकार, हाइटेक कंपनी ने अपने सांसारिक विकास को मजबूत करने के लिए Acquisition का उपयोग किया, जिससे वह उन नवाचारों का लाभ उठा सकती थी और उसकी उच्चतम गुणवत्ता उत्पादों की व्यापारिकता में मदद कर सकती थी।

मूल्य मूल्यांकन की पारदर्शिता (Valuation Transparency)

एक कंपनी जब सार्वजनिक होने की प्रक्रिया में आती है, तो उसके Stock का Price मूल्यांकन के द्वारा तय किया जाता है। यह मूल्य उस कंपनी की True Value की परदर्शिता करता है और निवेशकों को सही जानकारी प्रदान करता है कि वे कितनी सशक्त और सफल कंपनी में निवेश कर रहे हैं।

उदहारण: समझने के लिए, चलिए मान लें कि “XYZ तकनीकी कंपनी” IPO के लिए सार्वजनिक हो रही है। आईपीओ के दौरान, निवेशकों के सामने आये गए वित्तीय डेटा और कंपनी की स्थिति के आधार पर कंपनी की मूल्य मूल्यांकन की जाएगी। यदि कंपनी के सामर्थ्य और विकास की स्पष्ट जानकारी मिलती है, तो निवेशकों को सही मूल्य पर निवेश करने का मौका मिलेगा, जिससे उनके निवेश के फलस्वरूप उन्हें सही मूल्य मिल सकता है।

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डिविडेंड की संभावना (Dividend Potential)

जब एक कंपनी सफल होती है और उसका वित्तीय स्थिति मजबूत होता है, तो वह अपने Shareholders को Dividend के रूप में पैसे देती है। डिविडेंड एक तरह की वित्तीय भागीदारी का परिणाम होता है, जिसमें निवेशकों को उनके निवेश पर एक नियमित आय स्रोत मिलता है। यह एक सुरक्षित तरीका होता है निवेशकों के लिए क्योंकि वे कंपनी के सफलता के साथ उसके लाभ का हिस्सा बनते हैं।

उदाहरण: मान लीजिए आपने कंपनी ‘ABC इलेक्ट्रॉनिक्स’ के शेयर खरीदे हैं जो एक ऊर्जा उपकरण निर्माता है। कंपनी के सफलता के साथ, उसने बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा किया और उसकी मार्जिन मांग बढ़ गई है। इसके परिणामस्वरूप, कंपनी के निदेशक मंडल ने निर्णय लिया कि वे इस वर्ष एक बड़ा डिविडेंड वितरण करेंगे। जितने शेयर हैं, उसके हिसाब से आपको डिविडेंड मिलेगा। इससे आपको नियमित आय स्रोत मिलेगा और आपके निवेश का मूल्य भी बढ़ेगा।

निकासी रणनीति (Exit Strategy)

“Exit Strategy” एक आईपीओ के फायदे का हिस्सा है, जिसका मतलब होता है कि आईपीओ के माध्यम से कंपनी निवेशकों को उनके निवेश को लिक्विड करने की सुविधा प्रदान करती है।

उदाहरण: यह सोचें कि आपने एक कंपनी के आईपीओ में निवेश किया है और आपके पास शेयर्स हैं। धीरे-धीरे, अगर आपका निवेश मौजूदा मार्केट में अच्छे मूल्य पर बेचने के लिए उपयुक्त हो जाता है, तो आप अपने निवेश को Liquidate कर सकते हैं। यह निवेशकों को Exit करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जिससे वे उन शेयरों को बेचकर अपने निवेश की मूल्य वृद्धि पर लाभ उठा सकते हैं और निवेश के प्रति अपने प्राथमिकताओं के अनुसार निकास कर सकते हैं।

हिस्सेदार अधिकार (हिस्सेदार अधिकार)

आईपीओ के माध्यम से निवेश करने वाले व्यक्तियों को कंपनी के हिस्सेदार बनाने का अधिकार होता है। इसका मतलब है कि वे कंपनी के मामूले और निर्णयों में भागीदारी कर सकते हैं। उन्हें महत्वपूर्ण निर्णयों पर मतदान करने की स्वतंत्रता मिलती है, जैसे कि कंपनी के बोर्ड में सदस्य चुनाव, महत्वपूर्ण निवेश योजनाएँ, और अन्य बड़े निर्णय।

उदाहरण: एक उदाहरण के रूप में, सोचिए आपने एक खुदरा कंपनी में आईपीओ में निवेश किया है और आपके पास उस कंपनी के 500 Shares हैं। जब कंपनी के बोर्ड ने नयी मार्केटिंग योजना की बहस की, तो आपके पास भी मतदान करने का अधिकार होता है। आप योजना की विश्लेषण करके अपने मत का दें सकते हैं, और अगर बहुत सारे हिस्सेदार इसे समर्थन देते हैं, तो योजना पारित हो सकती है। इस तरीके से आप कंपनी के निर्णयों में सहभागी बनते हैं।

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बाजार कुशलता (Market Efficiency)

आईपीओ के फायदे में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जब किसी कंपनी का आईपीओ होता है, तो उसके स्टॉक का बाजार मूल्य स्थानीय और विश्व बाजारों में सही रूप से प्रतिबिंबित होता है। इसका मतलब है कि सभी निवेशक और वित्तीय विश्लेषक इसके सच्चे मूल्य की पहचान कर सकते हैं और उसके आधार पर निवेश कर सकते हैं। इससे बाजार में सही मूल्य का प्रतिबिंब बनता है और उसके साथ ही वित्तीय निर्णय भी सटीकता के साथ लिए जा सकते हैं।

उदाहरण: मान लीजिए एक तकनीकी कंपनी ने आईपीओ के माध्यम से सार्वजनिक होने का निर्णय लिया। उसकी तकनीक काफी अनोखी है और उसका प्रोटोटाइप पहले से ही बाजार में प्रस्तुत है। जब उसका आईपीओ होता है, तो उसके स्टॉक का मूल्य तत्काल ऊपर बढ़ता है क्योंकि बाजार के निवेशक उसकी तकनीक के पोटेंशियल को समझते हैं। यह आवश्यक है कि बाजार में तत्काल और सही मूल्य तय किया जाए ताकि निवेशकों को यथासंभाव लाभ हो सके और वित्तीय निर्णय उचित ढंग से लिए जा सके।

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IPO के फायदे और नुकसान निष्कर्ष (Conclusion)

समय के साथ, आईपीओ के लाभ और नुकसान दिखाते हैं कि निवेश अच्छे तथा विचारशील तरीके से किया जाना चाहिए। संतुलित निवेशकों के लिए यह एक अवसर प्रदान कर सकता है, जबकि अवस्थानिकता की स्थितियों में सतर्क रहना महत्वपूर्ण है। निवेशकों को उचित जानकारी प्राप्त करके, उनके निवेश के फैसलों को और भी मजबूत बनाने के लिए उन्नत और सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ना चाहिए।

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Sahil Dhimaan
Sahil Dhimaan

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