12वीं फेल ने जामुन से Rs 20Cr की कंपनी बनाली [ जानिये कैसे ]

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मिलिए राजेश ओझा से, 12वीं की परीक्षा में असफल होने और कृषि के बारे में कोई पूर्व ज्ञान न होने जैसी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, राजेश ओझा ने कृषि उधोग में ही JOVAKI AGROFOOD INDIA PVT LTD और Tribal Veda जैसी 20 करोड़ की कंपनी के मालिक बन चुके हैं।

JOVAKI AGROFOOD INDIA PVT LTD एक उदयपुर स्थित food processing कंपनी है जिसकी स्थापना 2017 में हुई थी जो कस्टर्ड सेब, जामुन, आंवला आदि जैसे वन फलों को विभिन प्रकार से ग्राहकों तक पहुंचती है।

Tribal Veda एक ऑनलाइन प्लेटफार्म है जिसकी स्थापना अक्टूबर 2021 में हुई, ये प्लेटफार्म जामुन, जिसे जावा प्लम या इंडियन ब्लैकबेरी के नाम से भी जाना जाता है, से बने प्राकृतिक और जैविक उत्पाद बेचता है।

पारिवारिक दबाव के बावजूद, दृढ़ संकल्प ने राजेश को उद्यमिता की दुनिया में कदम रखने के लिए प्रेरित किया, और अब वे इन दोनों कंपनियों के मालिक है जहां वह अपनी शर्तों पर सफलता को फिर से परिभाषित कर रहे हैं।

असफलता से भाग्य तक: राजेश ओझा की प्रेरक यात्रा

the success story of rajesh ojha founder of tribal veda and jovaki

पाली जिले के मध्य में, जहां राजस्थान और उदयपुर की सीमाएं मिलती हैं, बेरा नाम का अनोखा गांव स्थित है, जो अपने सदाबहार, फलों से लदे पेड़ों और आदिवासी समुदायों के लिए जाना जाता है।

राजेश ओझा इस गांव में जन्मे, पले-बढ़े और साक्षी बने उन चुनौतियों का जिसका सामना गावं के आम लोग कर रहे थे।

दरअसल, ये आदिवासी समुदाय के लोग हर सुबह, फलों से लदे पेड़ों से अवला, सीताफल (कस्टर्ड सेब) और बहुत कुछ तोड़ते थे और टोकरी में भरकर बाजारों में ले जाते थे। और अपने प्रचुर फलों की समय पर बिक्री के लिए संघर्ष करते थे।

गाँव में रहते हुए राजेश ने आदिवासियों की दैनिक दिनचर्या को ध्यान से देखा, जो खराब होने के डर से अपने फलों को कम पैसों पर जल्दी से बेचने के लिए मजबूर थे।

लेकिन बड़े होने पर वो मुंबई चले गए और वहां 12वीं परीक्षा में असफल होने के बाद राजेश ओझा को एक चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा। बिना डिग्री के मुंबई में अच्छी से नौकरी पाना मुश्किल था। इसलिए 2016 में उन्होंने एक नई शुरुआत की तलाश में अपने गृहनगर लौटने का साहसिक निर्णय लिया।

गाँव में, उन्होंने देखा कि स्थानीय आदिवासी अपने फलों को अभी भी घाटे में बेच रहे थे, जिससे उन्हें बदलाव लाने की प्रेरणा मिली। इस अवलोकन ने राजेश में उद्यमशीलता की भावना जगाई, जिससे उन्होंने 20 करोड़ की कंपनी स्थापित की, जिसने न केवल उनका जीवन बदल दिया, बल्कि उनके साथी ग्रामीणों की आजीविका में भी सुधार किया।

कैसे ढूँढा बिजनेस आईडिया?

प्रेरणा तब मिली जब उन्होंने आदिवासी समुदायों को कम दरों पर अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर होते देखा। इन समुदायों को सशक्त बनाने की इच्छा से प्रेरित होकर, राजेश ने एक ऐसे ब्रांड की कल्पना की जो उन्हें जल्दबाजी में बिक्री के दबाव के बिना अधिक कमाई करने में सक्षम बनाए। यहाँ से उन्हें food processing कंपनी JOVAKI AGROFOOD INDIA PVT LTD को स्थापित करने का ख्याल आया।

कम दाम में बिकना उनकी मजबूरी थिस (They were forced to sell at a low rate)

Rajesh Oza, Founder of TribalVeda and Jovaki

हालाँकि उनके इस विचार को शुरुआती झिझक का सामना करना पड़ा, लेकिन 2017 में शादी के बाद उन्हें पूजा ओझा का साथ मिला जो कंपनी की co-founder बनी। पूजा न केवल उनकी जीवन साथी बनीं, बल्कि एक व्यावसायिक भागीदार भी बनीं।

आज, उनकी कंपनी, राजस्थान में आदिवासी समुदायों के लिए आशा की किरण बनकर खड़ी है। अपने समर्पण के माध्यम से, 1,000 आदिवासी महिलाएं अब खुशहाल जीवन जी रही हैं, जो इस जोड़े के साझा उत्साह की परिवर्तनकारी शक्ति को प्रदर्शित करता है।

कैसे काम करती है राजेश ओझा की कंपनी

tribal veda and jovaki food processing business in hindi

अपने गाँव में कृषि की संभावनाओं को पहचानते हुए, राजेश और उनकी पत्नी पूजा ने पाया कि मौसमी फलों की प्रचुरता के बावजूद, संगठित प्रक्रियाओं (organized processes) की कमी प्रमुख कारण थे गावं वालों की फलों की बर्बादी का।

यह समझते हुए कि फलों के प्रसंस्करण (fruits processing) से उनका मूल्य बढ़ सकता है, उन्हें आदिवासी समुदायों का विश्वास जीता। इसके बाद राजेश व्यक्तिगत रूप से आदिवासी सदस्यों के साथ और जुड़ेने लगे।

फल प्रसंस्करण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे फलों को जैम, जूस, जेली आदि में परिवर्तित किया जाता है।

इसके बाद वे फलों को ऑनलाइन मार्केटिंग के माध्यम से बाजार में ले गए, जिसके लिए उन्होंने 2021 में अपनी दूसरी कंपनी Tribal Veda की शुरवात की जहाँ पर लोग इन दुर्लभ फलों को ऑनलाइन आर्डर कर सकते हैं।

राजेश ने अनुकूल कीमतों इन समुदायों से बातचीत की और आज इनके साथ कंपनी के प्रॉफिट में से लाभ को साझा करते हैं।

उत्पादन प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करके, ओझा न केवल इन महिलाओं के लिए उचित वेतन सुनिश्चित करता है बल्कि उन्हें अपने फल बेचने के लिए लंबी दूरी की यात्रा करने की आवश्यकता भी समाप्त करता है। क्यूंकि अब सभी फलों को प्रोसेस कर ऑनलाइन बेचा जाता है।

“हमें अपने फल बेचने के लिए 10-20 किमी तक पैदल चलना पड़ता था, और तब भी, हम उन्हें कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर थे। अब हमें अपने फलों के लिए अच्छी कीमतें मिलती हैं। हम उत्पादन करेते हैं, और ट्राइबलवेदा टीम हमसे फल लेने के लिए घर आती है।”

TribalVeda से जुड़े आदिवासी समुदाय

राजेश ओझा ने जामुन से की शुरवात

jamun food processing business making crores in hindi

राजेश ने ये बिजनेस अपनी पत्नी पूजा के साथ मिलकर 2 लाख रूपए की इन्वेस्टमेंट के साथ जामुन food processing unit से शुरवात की थी। पर 2021 में अपने फलों को ऑनलाइन अपने प्लेटफार्म Tribal Veda के माध्यम से बेचने के लिए उन्होंने जामुन को चुना।

पर जामुन ही क्यों? जामुन के औषधीय गुणों, विशेष रूप से मधुमेह रोगियों के लिए इसके लाभों से प्रभावित होकर, राजेश ने इस फल में एक विशेष opportunity देखि। जामुन साल में लगभग 20 दिन ही उपलब्ध रहता है, उन्होंने जामुन को साल भर उपलब्ध कराने के लिए TribalVeda के माध्यम से जामुन की फ़ूड प्रोसेसिंग की।

“कुछ भी बर्बाद नहीं होना चाहिए।” ट्राइबलवेद के पीछे का मूल विचार

इसलिए कंपनी जामुन के छिलके का उपयोग वर्मीकम्पोस्ट के लिए और बीजों के एक हिस्से का उपयोग वृक्षारोपण के लिए करती है। अभी हाल ही में केवल बी2सी जामुन की बिक्री से कंपनी ने 8 लाख रुपये का कारोबार किया था।

इसी तरह आदिवासी महिलाओं के साथ सहयोग करके, वे विभिन्न फलों के प्रसंस्करण चरणों में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, जैसे पहचान, कटाई, भंडारण, ग्रेडिंग, छंटाई, धुलाई, प्रसंस्करण और पैकेजिंग।

तीजीबाई नाम की एक आदिवासी महिला का कहना है कि ट्राइबलवेडा से प्रशिक्षण लेने से उन्हें बहुत मदद मिली है। वे सीताफल से बीज निकालना और फल से अलग-अलग चीजें बनाना सीखते हैं। जोवाकी इन महिलाओं की मदद करता है और उन्हें फलों की पहचान से लेकर पैकेजिंग तक प्रसंस्करण के सभी चरण सिखाता है।

वे विभिन्न मौसमों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले फलों के प्रसंस्करण पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे आदिवासी समुदाय व्यस्त रहते हैं और उनकी आय तीन गुना हो जाती है। पहले, महिलाएं साल में 15,000 रुपये से 20,000 रुपये कमाती थीं, लेकिन अब, सीज़न के दौरान, वे प्रति माह 15,000 रुपये अतिरिक्त कमाती हैं।

कंपनी की कमाई

CIA का कहना है कि ट्राइबल वेदा ने 2021 में 476.67 मिलियन कमाएटी थे। वही अब बात करें ऑनलाइन प्लेटफार्म जोवाकी की तो 2020 में, जोवाकी ने 2.53 करोड़ की नेट सेल्स की थी

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Sahil Dhimaan
Sahil Dhimaan

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